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शारीरिक विकास से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ निमà¥à¤¨ चार विशेषताà¤à¤ हैं-
(अ) नवजात शिशॠका आकार (Size of the Infant) – जनà¥à¤® के समय नवजात शिशॠका औसत à¤à¤¾à¤° 7.5 पौणà¥à¤¡ तथा औसत लमà¥à¤¬à¤¾à¤ˆ 19.5 इंच होती है। à¤à¤¾à¤° के औसत का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° 3-16 पौणà¥à¤¡ तक तथा लमà¥à¤¬à¤¾à¤ˆ के औसत का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° 15-21 इंच तक होता है। अकà¥à¤¸à¤° जनà¥à¤® के समय लड़के लड़कियों की अपेकà¥à¤·à¤¾ अधिक लमà¥à¤¬à¥‡ होते हैं। नवजात शिशॠके आकार को अनेक कारक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं। इनमें से कà¥à¤› पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारक निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार से हैं-
(i) माठका आहार (Maternal Diet)- माठके आहार में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ शिशॠके आकार को सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। सà¥à¤®à¤¿à¤¥ और वाइनà¥à¤¸ (Smith, 1947; Wines, 1947) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, “माठके आहार में पोषक ततà¥à¤µ जितने ही कम मातà¥à¤°à¤¾ में होंगे, नवजात शिशॠका आकार उतना ही छोटा होता है।†à¤à¤• अनà¥à¤¯ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ (Burke, et al., 1949) में यह देखा गया कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के अनà¥à¤¤à¤¿à¤® माह में माठदà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिया गया आहार नवजात शिशॠके आकार को सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
(ii) आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤¤à¤° (Economic Status) – माता-पिता के आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤¤à¤° का समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ माठके आहार की मातà¥à¤°à¤¾ और कà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ से है। गिबà¥à¤¸à¤¨ (Gibson, 1951) ने अपने अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ में देखा कि उन लोगों में, जिनका आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤¤à¤° निमà¥à¤¨ होता है, उनके बचà¥à¤šà¥‡ आकार में छोटे और कम à¤à¤¾à¤° वाले उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होते हैं।
(iii) जनà¥à¤®à¤•à¥à¤°à¤® (Birth Order) – कि सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ का पहला बचà¥à¤šà¤¾ लमà¥à¤¬à¤¾à¤ˆ में बाद के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ 1% छोटा तथा 9% हलà¥à¤•ा होता है।
(iv) गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ शिशॠकी कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Fetal Activity) – जो गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ शिशॠगरà¥à¤à¤•ालीन अवसà¥à¤¥à¤¾ में अधिक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² होते हैं, वे जनà¥à¤® के समय दà¥à¤¬à¤²à¥‡-पतले और कम à¤à¤¾à¤° के होते हैं।
(v) अनà¥à¤¯ कारक (Other Factors) – जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को जनà¥à¤® के 6 घणà¥à¤Ÿà¥‡ या इसके बाद Feed किया जाता है, वे अपना à¤à¤¾à¤° कम (lose) करते हैं। कà¥à¤› अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ कि जो बचà¥à¤šà¥‡ बसनà¥à¤¤ और गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में होते हैं, उनका अपना à¤à¤¾à¤° जलà¥à¤¦à¥€ बढ़ता है, परनà¥à¤¤à¥ यह ठंडे देशों के लिठसही है। अपने देश में जो बचà¥à¤šà¥‡ जाड़े के पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ में पैदा होते हैं, उनका अपना à¤à¤¾à¤° शीघà¥à¤° बढ़ता है। यह देखा गया है कि नया बचà¥à¤šà¤¾ जनà¥à¤® के 7 दिन तक à¤à¤¾à¤° में घटता है और 7 दिन के बाद उसका अपना à¤à¤¾à¤° बढ़ने लग जाता है। जनà¥à¤® से सात दिन के बाद शिशॠका à¤à¤¾à¤° कितना शीघà¥à¤° बढ़ेगा, यह कई कारकों पर निरà¥à¤à¤° करता है; जैसे- नवजात शिशॠका जनà¥à¤®à¤•à¥à¤°à¤®, यौन, जनà¥à¤® के समय आकार तथा जनà¥à¤® का पà¥à¤°à¤•ार आदि ।
(ब) शारीरिक अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ (Physical Proportions) –नवजात शिशॠवयसà¥à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ नहीं है।†(The Newborn Infant is not (an Adult) नवजात शिशॠके शारीरिक अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ वयसà¥à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होते हैं। उसका सिर उसके समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ शरीर का 1/4 होता है, जबकि वयसà¥à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सिर और शरीर का अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ 1: 7 होता है। खोपड़ी (Cranium) और चेहरे का अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ 8 : 1 होता है। नवजात शिशॠके कनà¥à¤§à¥‡ पतले, गरà¥à¤¦à¤¨ सà¤à¤•री, पेट कà¥à¤› लमà¥à¤¬à¤¾, नाक चपटी और जबड़े अविकसित होते हैं। उसकी à¤à¥à¤œà¤¾à¤à¤, धड़ तथा पैर और सिर की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में छोटी होती हैं।
(स) नवजात शिशॠके विशिषà¥à¤Ÿ गà¥à¤£ (Infantile Features)- नवजात शिशॠके कà¥à¤› पà¥à¤°à¤®à¥à¤– विशिषà¥à¤Ÿ गà¥à¤£ निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार से हैं-
1. तà¥à¤µà¤šà¤¾ (Skin) – जनà¥à¤® के समय बालक की तà¥à¤µà¤šà¤¾ हलà¥à¤•े गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ रंग की होती है। लगà¤à¤— जनà¥à¤® के 15 दिन बाद तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ होने लग जाता है।
2. आà¤à¤–ें (Eyes) – जनà¥à¤® के समय आà¤à¤–ें हलà¥à¤•े à¤à¥‚रे रंग की होती हैं तथा जनà¥à¤® के कà¥à¤› ही दिनों में आà¤à¤–ों का रंग बदलकर कोई सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ रंग बन जाता है-अधिकांश बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की आà¤à¤–ें काली होती हैं। आà¤à¤–ें आकार की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से परिपकà¥à¤µ लगती हैं, परनà¥à¤¤à¥ इनका इनकी गतियों पर कोई विशिषà¥à¤Ÿ नियनà¥à¤¤à¥à¤°à¤£ नहीं होता है। दोनों आà¤à¤–ों में कोई समनà¥à¤µà¤¯ नहीं होता है। à¤à¤¸à¤¾ लगता है कि नवजात शिशॠà¤à¤• आà¤à¤– से à¤à¤• ओर और दूसरी आà¤à¤– से दूसरी ओर देख रहा है।
3. दाà¤à¤¤ (Teeth) – जनà¥à¤® के समय शिशà¥à¤“ं में दाà¤à¤¤ नहीं पाठजाते हैं। । यह दाà¤à¤¤ निचले जबड़े में आगे की ओर होते हैं। अपने देश में नवजात शिशॠके दाà¤à¤¤ होना और à¤à¥€ अनौखी बात है। जनà¥à¤® के समय दाà¤à¤¤à¥‹à¤‚ के होने का कारण Genetic Factors है।
4. गरà¥à¤¦à¤¨ (Neck)- नवजात शिशॠकी गरà¥à¤¦à¤¨ बहà¥à¤¤ छोटी होती है। चूà¤à¤•ि समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ शरीर की अपेकà¥à¤·à¤¾ सिर बड़ा होता है, अतः छोटी गरà¥à¤¦à¤¨ दिखाई देती है। à¤à¤¸à¤¾ लगता है कि बालक का सिर, धड़ से ही जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है
5. मांसपेशियाठ(Muscles) – नवजात शिशॠकी माà¤à¤¸à¤ªà¥‡à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ छोटी और मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® होती हैं। शिशॠका इन पर अधिक नियनà¥à¤¤à¥à¤°à¤£ नहीं होता है। पैर और गरà¥à¤¦à¤¨ की मांसपेशियाठशरीर की अनà¥à¤¯ माà¤à¤¸à¤ªà¥‡à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ कम विकसित होती हैं।
6. बाल (Hair) – नवजात शिशॠके बाल रेशम की तरह मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® होते हैं। पीठऔर कनà¥à¤§à¥‹à¤‚ पर à¤à¥€ रेशम की तरह मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® बाल होते हैं, जो जनà¥à¤® से कà¥à¤› ही सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ बाद à¤à¤¡à¤¼ जाते हैं।
7. हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤ (Bones) – शिशॠकी हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤ बहà¥à¤¤ लचीली, कोमल और कारà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¥‡à¤œ की बनी हà¥à¤ˆ होती हैं।
(द) शरीरशासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Physiological Functions) – बालकों की अपेकà¥à¤·à¤¾ नवजात शिशà¥à¤“ं की शरीरशासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होती हैं-
1. हृदय की धड़कन (Heart Beats)- वयसà¥à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ नवजात शिशॠके हृदय की धड़कनें अधिक होती हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि नवजात शिशॠका हृदय आकार में छोटा होता है। सामानà¥à¤¯ रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª (Blood Pressure) बनाये रखने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• है कि हृदय की धड़कनें अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत अधिक गति से हों।
2. शà¥à¤µà¤¸à¤¨ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ (Respiration) – नवजात शिशॠजनà¥à¤® होते ही रोना पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ करता है। रोने से उसके फेफड़े फूल जाते हैं और शà¥à¤µà¤¸à¤¨-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आरमà¥à¤ हो जाती है कि शिशॠका जनà¥à¤® होते ही शिशॠका रोना उसके जीने के लिठअति आवशà¥à¤¯à¤• है। जनà¥à¤® के समय पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ में शà¥à¤µà¤¸à¤¨ -गति 40 से 50 Breathing Movement पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट होती है। परनà¥à¤¤à¥ à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के अनà¥à¤¤ तक यह गति 35 गतियाठपà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट रह जाती हैं। पà¥à¤°à¥Œà¤¢à¤¼ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में शà¥à¤µà¤¸à¤¨ की गति 18 गतियाठपà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट होती हैं। जब शिशॠजागता है तब शà¥à¤µà¤¸à¤¨ की गति कम 32-3 गतियाठपà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट और जब वह रोता है, उस समय शà¥à¤µà¤¸à¤¤ गति 133-3 गतियाठपà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट पहà¥à¤à¤š जाती हैं।
3. तापकà¥à¤°à¤® (Temperature)- नवजात शिशà¥à¤“ं में, चाहे वह अधिक सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हों, उनके शरीर का तापमान वयसà¥à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ कà¥à¤› अधिक ही नहीं होता है बलà¥à¤•ि यह परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤¶à¥€à¤² (Variable) à¤à¥€ अधिक होता है। नवजात शिशà¥à¤“ं का तापमान 98-2 से 99° फारेनहाइट तक होता है।
4. चूसने समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥€ सहजकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ गतियाठ(Reflex Sucking Movements)- जब नवजात शिशॠके होंठछà¥à¤ अथवा जब वह à¤à¥‚खा होता है, उस समय उसमें चूसने समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥€ सहज कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• गतियाठहोती हैं। à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ (B. Spock, जाते हैं 1964) में यह देखा गया है कि जो शिशॠसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करते हैं, उनमें Sucking Movements अनà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पाठजाते हैं।
5. नींद (Sleep) – नवजात शिशॠपनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¹ से बीस घणà¥à¤Ÿà¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ सोता है, परनà¥à¤¤à¥ वह इतने घणà¥à¤Ÿà¥‡ लगातार नहीं सोता है। वह लगà¤à¤— दो-दो घणà¥à¤Ÿà¥‡ की नींद लेता है। जैसे-जैसे उसकी आयॠबढ़ती जाती है, उसकी नींद का अनà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤² बढ़ता जाता है तथा उसकी नींद à¤à¥€ दो-दो घणà¥à¤Ÿà¥‡ के बजाय अधिक समय की होती है। à¤à¥‚ख होने पर, पीड़ा होने पर या आनà¥à¤¤à¤°à¤¿à¤• कषà¥à¤Ÿ होने पर उसकी नींद खà¥à¤² जाती है।
6. नाड़ी की गति (Pulse Rate)- जनà¥à¤® के समय शिशॠकी नाड़ी की गति 130 से 150 Beats पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट होती परनà¥à¤¤à¥ कà¥à¤› ही दिनों बाद यह केवल 177 रह जाती है। वयसà¥à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में नाड़ी की गति केवल 70 Beats पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट होती है। सोते समय शिशà¥à¤“ं की नाड़ी की गति 123.5 Beats पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट तथा रोते समय 2185 Beats पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट होती है।
7. à¤à¥‚ख के आकà¥à¤‚चन (Hunger Rhythms)- जनà¥à¤® के समय बालक में à¤à¥‚ख आकà¥à¤‚चन नहीं होते हैं। यह आकà¥à¤‚चन दो या तीन सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ की आयॠके बाद विकसित होते हैं। “नवजात शिशà¥à¤“ं का पेट 4 से 5 घणà¥à¤Ÿà¥‡ में खाली हो जाता है। उनकी छोटी आतें 7 से 8 घणà¥à¤Ÿà¥‡ में खाली हो जाती हैं तथा बड़ी आà¤à¤¤à¥‡à¤‚ 2 से 14 घणà¥à¤Ÿà¥‡ में खाली होती हैं। शिशॠमल-मूतà¥à¤° तà¥à¤¯à¤¾à¤— अकà¥à¤¸à¤° Feeding के 1/2 घणà¥à¤Ÿà¥‡ बाद करता है। चौबीस घणà¥à¤Ÿà¥‡ में शिशॠलगà¤à¤— 5 बार मल-मूतà¥à¤° का तà¥à¤¯à¤¾à¤— करता है।†यह देखा गया है कि शिशॠजिस समय मल-मूतà¥à¤° का तà¥à¤¯à¤¾à¤— करता है, उस समय वह चà¥à¤ª रहता है
(अ) सामानà¥à¤¯ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Mass Activities)
यह शिशॠकी वे कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ हैं, जिनमें उसका समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ शरीर समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ रहता है। यदि बालक के शरीर को कहीं से सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ किया जाय तो बालक समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ शरीर के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करता है। यह à¤à¥€ देखा गया है कि बालक के दाहिने हाथ को यदि सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ किया जाय तो बालके अपने बाà¤à¤ हाथ से à¤à¥€ समान अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करता है। “पहले पाà¤à¤š दिन तक बालक की यह सामानà¥à¤¯ अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ती ही जाती है।†पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒà¤•ाल शिशà¥à¤“ं की यह सामानà¥à¤¯ अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में होती हैं तथा अनà¥à¤¯ समय में कम (Irwin, 1930)। बालक में अधिकतर गतियाठउसके चेहरे और हाथ-पैरों में होती हैं। शरीर के अनà¥à¤¯ सà¤à¥€ अंगों में कम। गरà¥à¤à¤•ालीन अवसà¥à¤¥à¤¾ में जिन शिशà¥à¤“ं में कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ अधिक होती है, जनà¥à¤® के बाद इन शिशà¥à¤“ं में कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ अधिक रहती है (Sontag, 1946)। यह à¤à¥€ देखा गया है कि à¤à¥‚ख में, पीड़ा में, आनà¥à¤¤à¤°à¤¿à¤• कषà¥à¤Ÿ में या शिशॠको जब कोई शारीरिक असà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ होती है, तब उसकी यह Mass Activities बढ़ जाती है। अधिक पà¥à¤°à¤•ाश या अधिक अंधेरे सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में यदि शिशॠको ले जाया जाये, तो à¤à¥€ उसकी ‘मास à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥€à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€à¤œâ€™ बॠजाती है। वातावरण के तापकà¥à¤°à¤® का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ बालक की इन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं पर पड़ता है; परनà¥à¤¤à¥ तापकà¥à¤°à¤® में थोड़ा परिवरà¥à¤¤à¤¨ शिशॠकी इन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ नहीं करता है।
विशिषà¥à¤Ÿ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Specific Activities) ये कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ दो पà¥à¤°à¤•ार की होती हैं-
1. सहज- कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Reflexes)- यह वह कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ हैं, जो शिशॠविशिषà¥à¤Ÿ संवेदनातà¥à¤®à¤• उदà¥à¤¦à¥€à¤ªà¤•ों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ à¤à¤• निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ ढंग से करता है। यदि संवेदनातà¥à¤®à¤• उदà¥à¤¦à¥€à¤ªà¤• बार-बार उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ किया जाय, तो à¤à¥€ ये कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ नहीं होती हैं। कà¥à¤› पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤, जो शिशॠमें पाई जाती है, वह इस पà¥à¤°à¤•ार से हैं–
(i) आà¤à¤– की पà¥à¤¤à¤²à¥€ से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ सहज कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ ( Pupilary Reflexes ) – यह आà¤à¤– की पà¥à¤¤à¤²à¥€ घटने-बढ़ने की सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है। इसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बालक आà¤à¤– की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ करता है। उसे अंधेरे से उजाले में ले जायें या उजाले से अंधेरे में ले जायें, तो वह इस सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अनà¥à¤•ूलन करते हैं। जनà¥à¤® के लगà¤à¤— दो घणà¥à¤Ÿà¥‡ में ही यह सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤—ोचर होने लग जाती है।
(ii) पाà¤à¤µ के तलà¥à¤µà¥‡ से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ सहन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Babinski Reflexcs)- यह वह सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है, जिसमें यदि बालक के पाà¤à¤µ के तलवे को सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ किया जाय, तो वह पैर की उà¤à¤—लियों को पंखे के समान फैला देता है (Fanning of Toes)। यह सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ नवजात शिशà¥à¤“ं में ही देखी गई है। लगà¤à¤— छह महीने की आयॠतक यह समापà¥à¤¤ हो जाती है।
(iii) माà¤à¤¸à¤ªà¥‡à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Tendon Reflexes)- यह वह सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है, जिसमें यदि बालक की माà¤à¤¸à¤ªà¥‡à¤¶à¥€ को सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ किया जाय, तो माà¤à¤¸à¤ªà¥‡à¤¶à¥€ में आकà¥à¤‚चन होता हà¥à¤† दिखाई देता है। (iv) चूसण सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Sucking Reflexes) शिशॠके गालों या ओठों को यदि सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ किया जाय, तो शिशॠओठों से चूसने की अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ करता है।
(v) अनà¥à¤¯ सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Other Reflexes) – छींकने, शà¥à¤µà¤¾à¤à¤¸ लेने, हृदय धड़कन समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥€, उदर-समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥€ आदि सहज-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ à¤à¥€ नवजात शिशà¥à¤“ं में पाई जाती हैं।
(2) सामानà¥à¤¯à¥€à¤•ृत अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ (Generalized Responses) – यह वह अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ हैं, जिनमें शरीर के à¤à¤• से अधिक à¤à¤¾à¤— समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ होते हैं। जनà¥à¤® के दो-तीन दिन तक शिशॠकी आà¤à¤–ें कà¤à¥€ खà¥à¤² जाती हैं तो कà¤à¥€ बनà¥à¤¦ हो जाती हैं। उसकी दोनों आà¤à¤–ों की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ समनà¥à¤µà¤¯à¥€à¤•ृत नहीं होती हैं। à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होता है कि वह à¤à¤• आà¤à¤– से à¤à¤• ओर और दूसरी आà¤à¤– से दूसरी ओर देख रहा है। शिशॠपहले दिन पà¥à¤°à¤•ाश की ओर बहà¥à¤¤ थोड़ी देर देख सकता है। कई बार जनà¥à¤® के समय शिशà¥à¤“ं की आà¤à¤–ों से आà¤à¤¸à¥‚ निकलते à¤à¥€ देखे गये हैं। इसी पà¥à¤°à¤•ार जनà¥à¤® के लगà¤à¤— 20 मिनट बाद शिशà¥à¤“ं को अपना अà¤à¤—ूठा चूसते à¤à¥€ देखा गया है। जनà¥à¤® के समय शिशॠकà¤à¥€ अपना मà¥à¤à¤¹ खोल लेता है, तो कà¤à¥€ बनà¥à¤¦ कर लेता है जनà¥à¤® के कà¥à¤› दिनों तक बालक अपने सिर को बहà¥à¤¤ थोड़ा घà¥à¤®à¤¾ सकता है। जनà¥à¤® के कà¥à¤› दिनों बाद बालक को यदि बैठाया जाय, तो बैठाने पर वह आगे की ओर गिरता है। वह बिना किसी उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ के हाथ की मà¥à¤Ÿà¥à¤ ी खोलता है और कà¤à¥€ बनà¥à¤¦ कर लेता है। उसके हाथ और पैरों में गतियाठजनà¥à¤® के तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ बाद पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ हो जाती हैं।
3. नवजात शिशॠका कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¦à¤¨ (Crying of the Newborn)
नवजात शिशॠका कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¦à¤¨ जनà¥à¤® के समय या जनà¥à¤® के कà¥à¤› ही देर में पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ हो जाता है। यही उसका पà¥à¤°à¤¥à¤® सà¥à¤µà¤° और à¤à¤¾à¤·à¤¾ होती है। जनà¥à¤® के कà¥à¤› समय तक शिशॠकी यह à¤à¤¾à¤·à¤¾ पूरà¥à¤£à¤¤à¤ƒ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार की सहज कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ होती है। जनà¥à¤® के समय बालक के कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¦à¤¨ का बहà¥à¤¤ बड़ा लाठहै। उसके कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¦à¤¨ से उसके फेफड़े फूल जाते हैं और उसको शà¥à¤µà¤¸à¤¨ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आरमà¥à¤ हो जाती है। शà¥à¤µà¤¸à¤¨ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ होने से उसके रकà¥à¤¤ को ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ मिलने लग जाती है। जनà¥à¤® के समय वह पहला अवसर होता है, जब बालक अपनी आवाज पà¥à¤°à¤¥à¤® बार सà¥à¤¨à¤¤à¤¾ है। जनà¥à¤® के 24 घणà¥à¤Ÿà¥‡ बाद ही शिशॠके कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¦à¤¨ के अरà¥à¤¥ बदल जाते हैं। नवजात शिशà¥à¤“ं का कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¦à¤¨ कà¥à¤› विशेष अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ होता है। रोते समय शिशॠहाथ-पैर चलाता है और कà¤à¥€ हाथ की मà¥à¤Ÿà¥à¤ ी खोलता है तो कà¤à¥€ बनà¥à¤¦ करता है।
शिशà¥à¤“ं के कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¦à¤¨ के कई कारण होते हैं। यह कारण या तो शारीरिक होते हैं या वातावरण समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥€; परनà¥à¤¤à¥ अकà¥à¤¸à¤° इनके रोने के कारण अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ होते हैं। ने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के रोने के निमà¥à¤¨ कारण बताये हैं-शोरगà¥à¤², पà¥à¤°à¤•ाश, उलà¥à¤Ÿà¥€ होना, अधिक गरà¥à¤®à¥€, सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कराने पर रोना, à¤à¥‚ख, अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ कारण आदि। सिजेरियन शिशॠअनà¥à¤¯ शिशà¥à¤“ं की अपेकà¥à¤·à¤¾ बहà¥à¤¤ कम रोते हैं। गरà¥à¤à¤•ालीन अवसà¥à¤¥à¤¾ में जिन शिशà¥à¤“ं की माताà¤à¤‚ अधिक औषधियों का उपयोग करती हैं या जनà¥à¤® के समय जिन शिशà¥à¤“ं को कोई नà¥à¤•सान हो जाता है, वे शिशॠअनà¥à¤¯ शिशà¥à¤“ं की अपेकà¥à¤·à¤¾ अधिक कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¦à¤¨ करते हैं।होता है, वे जनà¥à¤® के समय अनà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ बहà¥à¤¤ तेज रोते हैं।
4. नवजात शिशॠकी संवेदनशीलता (Sensitivities of the Neonate)
नवजात शिशॠकी संवेदनशीलता का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ कठिन है; कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस पà¥à¤°à¤•ार के अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ विधि से किये जाते हैं। अतः यह à¤à¥€ बताना कठिन है कि कौन-सी संवेदनाà¤à¤ शिशॠमें पाई जाती हैं और कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में पाई जाती हैं। गेसेल जो बचà¥à¤šà¥‡ गरà¥à¤à¤•ालीन अवसà¥à¤¥à¤¾ के पूरà¥à¤£ होने से पहले ही जनà¥à¤® ले लेते हैं, वे à¤à¥€ तीवà¥à¤° उदà¥à¤¦à¥€à¤ªà¤•ों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ उसी पà¥à¤°à¤•ार अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करते हैं, जिस पà¥à¤°à¤•ार अनà¥à¤¯ बालक शिशà¥à¤“ं में अनà¥à¤¯ संवेदनाओं की अपेकà¥à¤·à¤¾ सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶-संवेदना के अनेक उदाहरण दिये जा सकते हैं।â€
i. दृषà¥à¤Ÿà¤¿ (Sight) – जनà¥à¤® के समय आà¤à¤– का रेटिना, जिसमें दृषà¥à¤Ÿà¤¿ की संवेदना के सेलà¥à¤¸ पाये जाते हैं, पूरà¥à¤£ रूप से परिपकà¥à¤µ नहीं होता है। जनà¥à¤® के समय फोबिया में शंकॠ(Corics) बहà¥à¤¤ कम सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ होते हैं। अतः कहा जा सकता है कि जनà¥à¤® के समय शिशॠआंशिक रूप से ‘कलर बà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤£à¥à¤¡â€™ होता है।
ii. शà¥à¤°à¤µà¤£ (Hearing)- जनà¥à¤® के समय यह जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤°à¥€ अनà¥à¤¯ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• कम विकसित होती है। जनà¥à¤® के तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ बाद नवजात शिशॠसà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं या नहीं, इस समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों में à¤à¤• मत नहीं है।
iii. सà¥à¤µà¤¾à¤¦ (Taste)- अनà¥à¤¯ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ यह जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤°à¥€ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• विकसित होती है। अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ से यह देखा गया है कि शिशॠमीठी उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾à¤“ं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ धनातà¥à¤®à¤• अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करते हैं और नमकीन, खटà¥à¤Ÿà¥€ तथा कड़वी चीजों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ ऋणातà¥à¤®à¤• अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करते हैं कि, सà¥à¤µà¤¾à¤¦ संवेदनशीलता सीमानà¥à¤¤ के समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में शिशà¥à¤“ं में अधिक वैयकà¥à¤¤à¤¿à¤• à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾à¤à¤ पायी जाती हैं।
iv. गनà¥à¤§ (Smell) गनà¥à¤§ संवेदनशीलता जनà¥à¤® के समय काफी विकसित होती है या वह जनà¥à¤® के कà¥à¤› ही दिनों में विकसित हो जाती है। माठयदि अपने सà¥à¤¤à¤¨ पर सिरके का अमà¥à¤², अमोनिया, पैटà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¿à¤¯à¤®, सनà¥à¤¤à¤°à¥‡ का तेल आदि लगाकर शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराये, तो शिशॠसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ नहीं करता है।
v. तà¥à¤µà¤• संवेदनशीलता (Skin Sensitivities) – सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶, दबाव, ताप और पीड़ा समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥€ संवदेनशीलता बालक में जनà¥à¤® के समय पाई जाती है या इसका विकास जनà¥à¤® के कà¥à¤› ही समय में हो जाता है। शरीर के अनà¥à¤¯ अंगों की अपेकà¥à¤·à¤¾ कà¥à¤› अंग अधिक संवेदनशील होते हैं। अनà¥à¤¯ अंगों की अपेकà¥à¤·à¤¾ होंठअधिक संवेदनशील होते हैं। ताप उदà¥à¤¦à¥€à¤ªà¤•ों की अपेकà¥à¤·à¤¾ शीत उदà¥à¤¦à¥€à¤ªà¤•ों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ शिशॠअधिक अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करता है। जनà¥à¤® के पà¥à¤°à¤¥à¤® दो दिन पीड़ा-संवेदना कà¥à¤› कमजोर होती है। होंठ, हथेली और पैर के तलवे में यह संवेदना अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पाई जाती है। इसी पà¥à¤°à¤•ार पलक, माथे पर और नाक की à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ में यह संवेदना अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पाई जाती है।
5. नवजात शिशॠके संवेग (Emotions of the Neonate) –
नवजात शिशà¥à¤“ं के संवेगों के समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में जो अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ हà¥à¤ हैं, वे कम हैं, परनà¥à¤¤à¥ जो à¤à¥€ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ हà¥à¤ हैं, वे विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ अधिक हैं। शिशॠमें जनà¥à¤® के समय या जनà¥à¤® के कà¥à¤› ही समय बाद तीन संवेग पाठजाते हैं। वाटसन का यह à¤à¥€ विचार है कि यह संवेग कà¥à¤› विशिषà¥à¤Ÿ उदà¥à¤¦à¥€à¤ªà¤•ों के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शिशà¥à¤“ं में उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ किठजा सकते हैं। वाटसन के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बताये हà¥à¤ तीन पà¥à¤°à¤®à¥à¤– संवेग हैं-à¤à¤¯, कà¥à¤°à¥‹à¤§ और पà¥à¤°à¥‡à¤®, नवजात शिशà¥à¤“ं की संवेगातà¥à¤®à¤• अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• विकसित होती हैं। उनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, जो नवजात शिशॠगरà¥à¤à¤•ालीन अवसà¥à¤¥à¤¾ को पूरà¥à¤£ किठबिना उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो जाते हैं, उनमें à¤à¥€ समान पà¥à¤°à¤•ार की संवेगातà¥à¤®à¤• अनà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤ पाई जाती हैं।
जब माताà¤à¤ अपने रोते शिशà¥à¤“ं को वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤à¤¤à¤¾ के कारण परिवार के अनà¥à¤¯ लोगों को चà¥à¤ª कराने के लिठदे देती हैं या बचà¥à¤šà¥‡ की देखà¤à¤¾à¤² करने वाली आया को चà¥à¤ª कराने के लिठदे देती हैं तो वह बहà¥à¤§à¤¾ शिशॠको डरा-धमकाकर चà¥à¤ª कराते हैं, à¤à¤¸à¥‡ में बालक में à¤à¤¯ संवेग के अति विकसित होने की समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है।
कà¤à¥€-कà¤à¥€ यह à¤à¥€ देखा गया है कि माता की वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤à¤¤à¤¾ या अनà¥à¤¯ किसी कारणवश नवजात शिशॠका लालन-पालन सही ढंग से नहीं होता है। नवजात शिशॠयदि रो रहा है तो रोते-रोते सà¥à¤µà¤¯à¤‚ रो-रो कर चà¥à¤ª हो जाता है। इस पà¥à¤°à¤•ार की अवसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤ बालक में à¤à¤¯, असà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ और नैराशà¥à¤¯ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤à¤ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करती हैं।
6. नवजात शिशà¥à¤“ं में अधिगम की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ (Capacity for Learning in Infants)
कोई à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ किसी समसà¥à¤¯à¤¾ या कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का अधिगम तब कर सकता है, जब वह उस समसà¥à¤¯à¤¾ के समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में जागरूक हो। किसी समसà¥à¤¯à¤¾ के अधिगम के लिठयह à¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤• है कि अधिगमकरà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¾ के सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¥ इतने विकसित और परिपकà¥à¤µ हो कि वह समसà¥à¤¯à¤¾ का अधिगम कर सकें। नवजात शिशà¥à¤“ं के सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¥ और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• इतने परिपकà¥à¤µ नहीं होते हैं कि वे किसी समसà¥à¤¯à¤¾ का सरल से सरल विधि दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अधिगम कर सकें। नवजात शिशà¥à¤“ं में जागरà¥à¤•ता à¤à¥€ नहीं के बराबर पाई है।
नवजात शिशà¥à¤“ं के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ में अनà¥à¤¤à¤° कà¥à¤› ही दिनों में दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤—ोचर होने लगता है। हम सà¤à¥€ जानते हैं कि कà¥à¤› नवजात शिशॠसोने की तरह अचà¥à¤›à¥‡ और कीमती à¤à¥€ होते हैं और कà¥à¤› माता-पिता के लिठअतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• परेशानी पैदा करने वाले होते हैं। नवजात शिशà¥à¤“ं के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ में अनà¥à¤¤à¤° वंशानà¥à¤•à¥à¤°à¤® और वातावरण समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥€ कारकों के कारण तो होते ही हैं, साथ ही साथ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ में अनà¥à¤¤à¤° अपरिपकà¥à¤µ जनà¥à¤® (Premature Birth), जनà¥à¤® के समय की परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ तथा सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की दशाà¤à¤ आदि कारकों के कारण à¤à¥€ होते हैं।नवजात शिशॠके लिठजनà¥à¤® à¤à¤• दैहिक और मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• आघात (Physiological and Psychological Shock) है। इस आघात के कारण बालक में चिनà¥à¤¤à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो जाती है। इस बात का कोई पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ नहीं है कि जनà¥à¤® शिशॠके लिठआघात है और उनमें चिनà¥à¤¤à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करता है तथा जनà¥à¤® उनके वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ विकास को महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ ढंग से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। यह अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अवशà¥à¤¯ सिदà¥à¤§ हो चà¥à¤•ा है कि जो बालक जनà¥à¤® होते ही माठसे अलग कर दिये जाते हैं और माठसे दूर रखे जाते हैं, उनका विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में समायोजन उतना अचà¥à¤›à¤¾ नहीं होता है, जितना कि उन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का, जो माठके साथ रहते हैं।
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